मैमूद/ शैलेश मटियानी

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महमूद फिर ज़ोर बाँधने लगा, तो जद्दन ने दायाँ कान ऐंठते हुए, उसका मुँह अपनी ओर घुमा लिया। ठीक थूथने पर थप्पड़ मारती हुई बोली,…

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अन्धेर/प्रेमचंद

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नागपंचमी आई। साठे के जिन्दादिल नौजवानों ने रंग-बिरंगे जॉँघिये बनवाये। अखाड़े में ढोल की मर्दाना सदायें गूँजने लगीं। आसपास के पहलवान इकट्ठे हुए…

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कमज़ोर /अन्तोन चेख़व

आज मैं अपने बच्चों की अध्यापिका यूल्या वसिल्येव्ना का हिसाब चुकता करना चाहता था। “बैठ जाओ यूल्या वसिल्येव्ना।” मैंने उससे कहा, “तुम्हारा हिसाब…

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