बिसराम के बिरहे और भाष्यकार मुखराम की लोकदृष्टि

बिरह और वीरता भोजपुर के निवासियों के अभिन्न अंग हैं। शताब्दियों से इस अँचल की वीरप्रसू धरित्री अपने क्रोड़ में वीरता और विपन्नताओं…

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गुंजेश्वरी प्रसादः जिसने अन्तिम सांस भी समाजवादी चोले में ली……. 

-अरविन्द कुमार सिंह वह सन् 2008 का फरवरी या मार्च का महीना रहा होगा, जब पहली बार मैं और आजमगढ़ के धूर समाजवादी…

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