तो कांग्रेस की हार के निहितार्थ भाजपा के जीत से बड़े हैं ?

मोदी ब्रांड को इस बात के लिए हमेशा जाना जायेगा कि उसने इस चुनाव (2017)में राहुल गांधी को एक परिपक्व नेता के सांचे में ढाल दिया। इस चुनाव ने राहुल को पप्पू की छवि से बाहर निकाल एक राजनेता के रूप में स्थापित कर दिया। इस चुनाव ने कांग्रेस के अंदर यह विश्वास भर दिया कि मोदी अपराजेय योद्धा नहीं रहे। मोदी को भी हराया जा सकता है और उनकी अपराजेय की मिथक ‘जनधारणा’ को तोड़ा भी जा सकता है



अरविंद सिंह
◆आप यह कल्पना करें कि गुजरात में पिछले 22सालों से भाजपा की सरकार है। कांग्रेस वहां चुनाव के बाद कभी नज़र ही नहीं आती थी। मतलब वहां सत्ता का प्रतिपक्ष ना के बराबर है। प्रतिरोध की आवाजें यानि प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी स्वयं जनता के हवाले है। ऐसे में सन् 2017 के विधान सभा चुनाव के परिणाम और परिवेश के निहितार्थ को समझना ना केवल आवश्यक है बल्कि सामयिक भी है। भारत सरकार के सभी मंत्री, भाजपा के सभी सांसद, विधायक, मुख्यमंत्री, संघ, वीएचपी और सबसे महत्वपू्र्ण देश के सबसे ताकतवर नेता यानि स्वयं ‘प्रधानमंत्री जी’ की 34 रैलियां और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का 150 सीटों का लक्ष्य, बावजूद परिणाम के स्तर पर 99 सीटे यानि दहाई में ही सिमट गयी। यह ताकत अपने पराक्रम के विस्तार के बाद भी सैकडा़ भी नहीं पहुँच सकी। जबकि मोदी और शाह दोनों ही गुजरात से आते हैं। और वर्तमान से पूर्व,उनकी मूल पहचान एक गुजराती के तौर पर है। दूसरी तरफ राहुल गांधी की कांग्रेस, जो इस चुनाव में गुजरात में आती है, जिसका ना तो जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रबंधन है और नहीं समय रहते इसके लिए प्रयास ही किये गए । भाजपा जिंहे पप्पू कहती है। वह पप्पू गुजरात में अकेले प्रधानमंत्री की फौज से टकराता है और जो सवाल उठाता है, उसके जवाब शायद प्रधानमंत्री जी के पास नहीं होते हैं, या वह देना ही नहीं चाहते, बल्कि पाकिस्तान,और उसका भय दिखा गुजरातियों को डराते हैं । जबकि राहुल की भाषा संयमित और तरीका नैतिकता के आवरण में रहता है,उसका उदाहरण कांग्रेसी अय्यर की प्रधानमंत्री की गरिमा के विरूद्ध दिया बयान पर, उन्हे बाहर का रास्ता दिखाना है। जबकि भाजपा में इस तरह की परंपरा शायद नह़ीं है। बावजूद वह 80 सीटों तक पहुँच जाते हैं। कल्पना करें यदि प्रधानमंत्री जी इतनी तूफानी रैलियां नहीं कर पाते और अपने गुजराती अस्तित्व की दुहाई नहीं देते, प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ख्याल करते, तो फिर परिणाम क्या होता ? स्पष्ट है गुजरात से हाथ धो देना पडता। क्या यह एक सामान्य घटना होती, शायद नहीं। 9-10 सीटों का इधर से उधर हो जाना, ना तो बहुत बड़ी जीत है ना बहुत बड़ी हार ही है ? वह भी तब, जब एक तरफ राज्य समेत केंद्र की सरकार अपनी सर्वोत्तम शक्ति के साथ किसी भी कीमत पर चुनाव जितने में लगी हो।

जरा कल्पना करें कि यह चुनाव प्रधानमंत्री जी यदि हार जाते, तो क्या संदेश जाता कि प्रधानमंत्री जी अब अपने गृह राज्य का विश्वास भी खो चुके हैं। जबकि वह स्वयं इस चुनाव के चेहरे व ब्रांड दोनों ही थे। गुजरात के चुनाव में उनकी गुजराती अस्मिता, उनकी गुजराती भाषा में स्पष्ट देखी और सुनी गयी।
इस चुनाव में ‘मोदी ब्रांड’ गुजरात भले ही जीत गया लेकिन गुजरात का दिल तो वह कथित ‘पप्पू’ जो अब देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष बन चुके हैं ने ही जीता। यानि भाजपा गुजरात जीत कर भी हार गयी और कांग्रेस गुजरात हार कर भी जीत गयी । मोदी ब्रांड को इस बात के लिए हमेशा जाना जायेगा कि उसने इस चुनाव (2017)में राहुल गांधी को एक परिपक्व नेता के सांचे में ढाल दिया। इस चुनाव ने राहुल को पप्पू की छवि से बाहर निकाल एक राजनेता के रूप में स्थापित कर दिया। इस चुनाव ने कांग्रेस के अंदर यह विश्वास भर दिया कि मोदी अपराजेय योद्धा नहीं रहे। मोदी को भी हराया जा सकता है और उनकी अपराजेय की मिथक ‘जनधारणा’ को तोड़ा भी जा सकता है। इस चुनाव में ‘मोदी ब्रांड’ ने ही गुजराती मोदी को अंदर तक भयभीत कर दिया। इस चुनाव ने,व्यक्ति की ब्रांड़ और साख दोनों को दांव पर लगा दिया। वह व्यक्ति, जो जितना ही अपनी नियति समझता है और जितना ही, एक मात्र सच है, बाकी सब बेमानी। उसके लिए जीत ही आखरी सत्य है। मोदी जी ने उसी ब्रांड और साख की रक्षा की है जो उनके लिए जरुरी भी था।
इस चुनाव ने देश को एक बार फिर जन संगठन और जन संघर्ष से पैदा हुए तीन नेता हार्दिक,जिग्नेस,अल्पेश के रूप में दिये। इस चुनाव ने यह भी साबित कर दिया कि प्रधानमंत्री जी,चुनाव जितने के लिए ही लड़ते हैं चाहे उसके लिए कितनी ही बडी़ कुर्बानी क्यों न देनी पडे़। उनकी लोकप्रियता और ब्रांड अभी उरोज पर है। इसके लिए लोकतंत्र भले ही जख्म़ी हो जाए। मोदी जी को बस जीत चाहिए, चाहे कीमत जो चुकानी पड़े। गुजरात और हिमाचल के चुनाव यह साबित करते हैं कि दोनों स्थानों पर भाजपा नहीं ‘मोदी ब्रांड’ ही जीता है। और गुजरात यह साबित करता है कि यह ब्रांड अपराजेय नहीं है।

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