अमन की अमनिका एं

1
मैं एक चराग़ की तरह जलने में रह गया
मौसम की तरह रोज़ बदलने में रह गया
हर हमसफ़र ने राह में धोका दिया मुझे
मंजिल न आई और मैं चलने में रह गया
सूरज की तरह रोज़ निकलने में रह गया

2
गीत गाने को जी चाहता है
प्रीत पाने को जी चाहता है
झील सी गहरी आँख तेरी
पास आने को जी चाहता है
डूब जाने को जी चाहता है

3
मैं आंसू तुम्हारे छलकने न दूंगा
हवा से चिराग़ों को बुझने न दूंगा
मेरी ज़िंदगी एक बहता है दरिया
मैं दरिया को हरगिज़ भी रुकने न दूंगा
क़दम अपने पी कर बहकने न दूंगा

4
देख मेरी आँखों में क्या है
सुन मेरी सांसों में क्या है
दिल से दिल की बातें मत कर
दिल, दिल की बातों में क्या है
दिन में क्या रातों में क्या है

5
खुशबुओं की तरह मैं बिखर जाऊंगा
एक जगह रुक गया तो मैं मर जाऊंगा
दुनिया वाले मुझे कुछ भी समझा करें
मैं तो दुश्मन के भी अपने घर जाऊंगा
कोई आवाज़ देगा ठहर जाऊंगा

6
हंस हंस के मेरा बच्चा परछाई देखता है
छू – छू के उंगलियों से तनहाई देखता है
मशहूर हो गया है जब से जवान होकर
हर शह्र – शह्र मेरी रूसवाई देखता है
ऐसे के जैसे कोई हरजाई देखता है

7
अपने जो खास हैं वो हमसे हसद रखते हैं
नफ़रतें और अदावत की रसद रखते हैं
हमने देखा है परेशां हैं यहाँ पर वो लोग
आसमां चाहते हैं बौनों का क़द रखते हैं
काम कुछ करते नहीं झूठी सनद रखते हैं

8
बात झूंठी बनाने लगे हैं
ऊँची बोली लगाने लगे हैं
मेहरबानी पे जो थे हमारी
हमसे आँखे मिलाने लगे हैं
वो हंसी उड़ाने लगे हैं

9
मदारी डमरू बजा रहा था
एक आँख अपनी दबा रहा था
जमूरा लेटा हुआ ज़मीं पर
लोकतांत्रिक गुर बता रहा था
लगातार ही मुस्कुरा रहा था

10
क्या है दुनिया ये देख लेने दो
थोड़ा मुझको भी खेल लेने दो
रात बड़ी बेचैनीयों में बीती है
एक झलक अपनी देख लेने दो
अपनी बाहों में घेर लेने दो

11
देवताओं की बात करते हैं
देश- जनता से घात करते हैं
पाँच सालों में आँख खुलती है
साफ वोटों पे हाथ करते हैं
रात दिन जात-पात करते हैं

12
मुझे घर बैठे शोहरत दे रही थी
हवा थी गर्म लज्ज़त दे रही थी
मेरे माथे पे था मेरा पसीना
खुशी मेरी ही मेहनत दे रही थी
अमनिका मुझको ताकत दे रही थी

13.
यह कैसा चमत्कार निकला
दोस्त मेरा मक्कार निकला
दोस्ती दुश्मनी जान न पाया
हाकिम भी तरफदार निकला
नासमझ समझदार निकला

14.
मुझे चाहने वाला कौन है
मुझे मारने वाला कौन है
मेरा खुदा है मेरा रखवाला
मुझे पालने वाला कौन है
मुझे काटने वाला कैन है

15.
हमसे हमारी तरह मिल सके तो मिल
हमसे हमारी तरह कह सके तो मिल
यहां बहुत हैं मगरूर कोेेई कमी नहीं
रात हो चुकी सुबह मिल सके तो मिल
जैसा भी हूं मुझे अपना सके तो मिल

16.
जो है तिरे शहर का हालचाल
वो है मिरे शहर का हालचाल
जिसे जो करना था कर चला
बुरा है तिरे शहर का हालचाल
बुरा है मिरे शहर का हालचाल

17.
खुशी गम हो गई
छांव धूप हो गई
एक नदी क्या गई
प्यासी धरा हो गई
बेटी जुदा हो गई

18.
बचपन का खेल याद आए है
जोश ए जवानी याद आए है
बूढापन लगता है अपराध सा
ना सोए है ना कुछ खाए है
ना रोए है ना कुछ गाए है

19.
बैठा ना जाए, बैठ जाए तो उठा ना जाए
कहने को जी चाहे मगर कुछ कहा ना जाए
बुढापा है ऐसा रोग दोस्तों सहा ना जाए
जिया ना जाए और मोहवश मरा ना जाए
रग रग में इतना दर्द कि दर्द सहा ना जाए

20.
फिर कोई पुकारेगा जनता को
फिर कोई दुलारेगा जनता को
जनता बिन सरकार नहीं बनती
फिर कोई सुनाएगा जनता को
फिर कोई बुलाएगा जनता को

21.
जो मुझसे हर बात छुपाता है
जो मुझसे हर राज छुपाता है
कैसे उस पे भरोसा कर लूं
जो मुझसे दिन रात छुपाता है
जो मुझसे सुब्ह शाम छुपाता है

22.
वो मुझसे मेरा हक मांगता है
वो मुझसे खुला खत मांगता है
हमदर्दी का आलम तो देखिए
वो मुझसे मेरा कल मांगता है
वो मुझसे मेरा दम मांगता है

23.
गुब्बारे को इतना ना दबा बाबू
वेतन से अधिक ना कमा बाबू
टूटते हैं ख्वाब जागने पर सभी
बातें हैं, बातें इतनी ना बना बाबू
गरीब को इतना ना सता बाबू

24.
लंबा हो गया सफर घर कब आओगे साहिब
कुछ तो बात है बात कब बताओगे साहिब
एक फूल मुरझा गया है लंबे इंतजार में
माली बनकर पौधे कब उगाओगे साहिब
अपने कंधे पर यात्रा कब कराअेगे साहिब

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