आओ राजनीति खेलें/अमन कुमार त्यागी

राजनीति जानना अलग बात है, समझना अलग और करना अलग बात है। यह खेल बहुत ही अजीब है। इस खेल में कितने खिलाड़ी होने चाहिए अभी विद्वान यह निश्चित नहीं कर पाए हैं। इस खेल के मैदान की नाप सीमित भी हो सकती है और असीमित भी। इसमें आपको हंसना भी आना चाहिए और रोना भी। ईमानदारी और बेईमानी के सांचे में फिट नहीं होना चाहिए और न ही डर व निडरता स्थाई होनी चाहिए। बल्कि कहा जाए तो आपके और आपकी धन दौलत के साथ-साथ आपके मुख्य लक्ष्य के सिवा कुछ भी स्थाई नहीं होना चाहिए। मोह तो होना ही नहीं चाहिए। रही बात सिद्धांतों की तो लोग कुछ भी कहते रहें आपका सिद्धांत ऐसा होना चाहिए जो आपको आपके लक्ष्य की ओर ले जाए भले ही वह पल-पल में हजारों बार बदले। जानते हैं आपने एक बार राजनीति का खेल खेलना शुरू किया तो आप इसके बिना नहीं रह पाएंगे, चाहे दुनिया इधर से उधर क्यों न हो जाए। रही बात कैरियर की तो यह आपको तय करना है कि आप चाहते क्या हैं? यही वह क्षेत्र है जो आपको क्लर्क, पीसीएस या आईएएस तो नहीं बना सकता लेकिन ये पढेलिखे लोग आपका आदेश मानने के लिए लाईन लगा कर खड़े हो सकते हैं। रही बात एजुकेशन की तो उसकी कोई खास शर्त इस खेल में नहीं है। राजनीति आपको नेता बनाती है और ढंग से खेली गई तो नेता जी बना देती है और यदि महारत हासिल हो गई तो माननीय नेता जी भी बना देती है। हार गए तब भी नेता जी और जीत गए तब भी नेता जी। है न कमाल का खेल?
राजनीति में तीन तरह के खिलाड़ी होते हैं। एक, वह खिलाड़ी जो राजनीति अच्छी तरह जानते हैं। ऐसे खिलाड़ी स्वयं राजनीति नहीं करते बल्कि करने वालों को उकसाते हैं, उनका उत्साहवर्धन करते हैं और समय आने पर दूसरे के पाले में भी खड़े दिखाई दे सकते हैं, यहां तक कि एक कप चाय न मिलने या पाँव छुआई न होने पर घोषणा कर सकते हैं कि उनका राजनीति से कोई लेनादेना नहीं है और जितने लोग आपके पक्ष में किए थे उन्हें आपसे दूर करने का काम भी कर सकते हैं। इनका निशाना कहीं और होता है और ये गोल कहीं और करते हैं।
दूसरे वह होते हैं जो राजनीति को अच्छी तरह जानते हैं। ये किसी भी पान की दुकान या चैपाल पर चर्चा करते हुए मिल जाएंगे। इन्हें वार्ड मेंबर से लेकर देश के राष्ट्रपति तक की खबर होती है। कौन क्या करने वाला है और किसने क्या किया है सब जानते हैं। भविष्य की घोषण करना और इतिहास याद करना इनका मुख्य कार्य होता है। सुबह से शाम हो जाती है और शाम से रात, फिर रात से सुबह तक यह मैदान में डटे रह सकते हैं। यह तब तक चर्चा करते रह सकते हैं जब तक यह स्वयं चाहें। एक तरह से यह दर्शक, श्रोता और रैफरी की भूमिका निभाते हैं।
तीसरे वह होते हैं जो राजनीति खेलते हैं। यह राजनीति के खेल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आपको लगता है कि यह लोग पहली और दूसरी किस्म के लोगों के बहकावे में आकर राजनीति खेल रहे हैं। इनका खेल खराब हो सकता है। होता भी है ऐसा। मगर सदैव ही नहीं होता। जब कोई मैच हार जाते हैं तब जरूर ऐसा लगता है कि यदि उसकी बात न मानी होती तो अच्छा था या फिर यह भी लगता है कि फलां की बात मान ली होती तो अच्छा था। यही वह खेल है जहां मानो या ना मानो, दोनों ही परिस्थितियों में परिणाम आपके पक्ष में आते हैं। एक बात और, राजनीति के खिलाड़ियों को मार्गदर्शन निशुल्क नहीं मिलता है। उन्हें इसके लिए शुल्क अदा करना होता है। वह नकद या फिर शबाब और शराब के रूप में हो सकता है। कितने ही राजनीतिज्ञ इस खेल में बाप बन चुके हैं। जिनमें कुछ का पता चल जाता है और कुछ का नहीं भी चलता। राजनीति के इस खिलाड़ी के साथ कुछ भी हो सकता है। वह एक ही झटके में रंक भी बन सकता है और राजा भी। इस तरह के खिलड़ियों के लिए खतरे अधिक हैं। ऐसे खिलाड़ियों को मोह से बहुत दूर रहना होता है किंतु माया से दूर ये नहीं रह सकते।
जितना जानता था उतना मैंने आपको बता दिया। यह अल्पज्ञान है। इतनी सी बात पर विश्वास करके राजनीति खेलने के लिए आवेदन मत कर देना। सत्यता जानने के लिए अन्य स्रोत भी आपके आस-पास ही उपलब्ध हैं। आप राजनीति के किसी भी सेंटर पर जाकर अपनी जानकारी में इजाफा कर सकते हैं किंतु सावधान! किसी भी सेंटर पर जाकर आपको यह कतई नहीं कहना है कि मैं राजनीति सीखने आया हूं। नहीं तो जिंदगी भर रह जाओगे कुर्सियां लगाने व पानी पिलाने में। भले ही आपको कुछ भी न आता हो मगर सिद्ध यही करना है कि आप राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं। आपने कितनों को जितवाया है और कितनों को हरवाया है? यह इस खेल का सिद्धांत है कि आपको ज्ञान न होते हुए भी ज्ञानवान बने रहना है। अधिक बोलेंगे तब भी आपकी क्वालिटि मानी जाएगी और कम बोलेंगे तब भी। शालीनता के साथ बोलना जानते हैं तब भी आपके लिए स्थान बन सकता है और गाली देकर बोलना जानते हैं तब भी। अब आप जाइए और अपने विवेक के अनुसार आवेदन कीजिए।
एक बात और ध्यान रखिए। हमारे देश में राजनीति के बहुत सारे अखाड़े हैं और अनगिनत खिलाड़ी। आप को अपनी बारी का इंतजार नहीं करना चाहिए बल्कि किसी को जब तक टंगड़ी नहीं मारेंगे तब तक आपके लिए स्थान नहीं बनने वाला है। यहां चयन की प्रक्रिया है जिसे आपको फालो करना ही पड़ेगा। टंगड़ी आप किसी को भी मार सकते हैं। चाहे आपके पिताजी हों या आपका भाई या फिर कोई भी सगा संबंधी। इसीलिए तो कहा गया है कि यहा मोह नहीं रखना है और माया से नहीं भागना है। आगे आप समझदार हैं। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। अब आप सूली पर चढ़कर अपना खेल शुरू कीजिए भली करेंगे भगवान।

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