रूस स्थित कज़ान संघीय विश्वविद्यालय में राम-संस्कृति पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

●ऋषभदेव शर्मा ने किया प्रतिभाग।

◆कज़ान, रूस, 12 मई, 2018।

● रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा’- मास्को, साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्थान-मुंबई, अयोध्या शोध संस्थान- अयोध्या और कज़ान संघीय विश्वविद्यालय, कज़ान के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें भारतीय और रूसी विशेषज्ञों ने “राम संस्कृति की विश्वयात्रा : साहित्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी” विषय पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।


अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कज़ान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लतीपोव ने कहा कि भारत की संस्कृति को जानने के लिए राम साहित्य को जानना अपरिहार्य है। समकुलपति प्रो. स्वेतलाना ने भारतीय दर्शन और रूसी संस्कृति के आपसी संबंध पर प्रकाश डाला तो अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने रामलीलाओं तथा ललित कलाओं के माध्यम से विश्व भर में भारतीय जीवन दृष्टि के प्रसार की व्याख्या की। दिशा-मास्को के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर सिंह ने रूस में हिंदी और रामकथा की लोकप्रियता पर चर्चा की तो संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने वर्तमान विश्व के लिए राम-संस्कृति की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। डॉ. जयसुंदर ने भारत और रूस के आपसी संबंधों की दृढ़ता के लिए रामकथा की आवश्यकता बताई। कार्यकम का संचालन हिंदी में प्रो. ऋषभ देव शर्मा ने तथा रूसी भाषा में प्रो. दिमित्री बोबकोव ने किया।
इस अवसर पर 20 रूसी और भारतीय विद्वानों को मानपत्र और शॉल समर्पित करके सम्मानित किया गया। विचार सत्र की अध्यक्षता डॉ. कुमार विनायक ने की तथा संचालन डॉ. सुशील कुमार आज़ाद ने किया। डॉ. सत्यनारायण ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी को सफल बनाने में हिंदी भाषा और साहित्य के रूसी छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की केंद्रीय भूमिका रही।
(स्रोतः कज़ान से ऋषभ देव शर्मा)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *