सहजा को यह जिम्मेदारी भाजपा ने खैरात में नहीं दी /अरविंद सिंह

आजमगढ़.

आजमगढ़ में प्रधानमंत्री का आगमन होने जा रहा है और उनके इस कार्यक्रम के सफल आयोजन की जिम्मेदारी जिस कंधे पर है।वह कोई और नहीं बल्कि हमारे आप के बीच का जननेता सहजानन्द राय हैं। जिन्हे इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संयोजक बनाया गया है और भाजपा ने यह जिम्मेदारी कोई खैरात में नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मगहर कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद दिया है। सहजा ने जिस प्रकार रातों दिन एक करके मगहर कार्यक्रम को सफल बनाया उसकी चर्चा न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश भर में है। सहजा एक जन नेता हैं यह तो सभी जानते हैं लेकिन वह एक कुशल प्रबंधक और सांगठनिक हुनरमंद रणनीतिकार हैं यह बात उन्होंने कई बार साबित की है। बताते हैं कि आज वे क्षेत्रीय महामंत्री गोरखपुर क्षेत्र भले हो लेकिन जब वे आजमगढ़ में संगठन को लेकर जनसंघर्ष कर रहे थे तो उस समय आजमगढ़ में भाजपा का कोई नाम लेवा तक नहीं था।कार्यकर्ता तो कार्यकर्ता भाजपा की बात करने वाले नेता तक कतराते थें। उन विषम परिस्थितियों में सहजा न केवल भाजपा दामन थामें रहें बल्कि संगठन को खडा़ करने में पसीना बहाते रहे। आजमगढ़ के जिलाध्यक्ष की जब भी बात आयेगी तो राममूरत सिंह जैसे सांगठनिक और ओजस्वी नेता हरेन्द्र सिंह के तेवर के बाद सहजानन्द राय का नाम बडे़ गर्व और सम्मान से लिया जाएगा।

बिना किसी राजनीतिक विरासत और पोलिटिकल गाडफादर के आज भी कोई सफल हो सकता है तो उसका जीवंत उदाहरण सहजा हैं। धन और बैभव के इर्द गिर्द घूूूमती आधुनिक राजनीति और चरणवंदना से लेकर गणेशपरिक्रमा तक जाती राजनीति में भी कोई ठेठ गांव से निकला युवक आज बिना किसी तामझाम के भाजपा के संगठन में क्षेत्रीय महामंत्री तक पहुँचा और देश के सबसे ताकतवर नेता के कार्यक्रम का संयोजक बनाया जाना अनायास तो बिल्कुल नहीं है। कुछ लोगों को इस बात से रश्क भले हो लेकिन यह नग्न सच्चाई है कि सहजा के पास कोई राजनीतिक विरासत नहीं है।बल्कि संघर्ष का लंबा दौर है। एक राजनीति कार्यकर्ता को कितने प्रकार की समस्याओं से जुझना पडता है। उन सभी से दो चार होते हुए सहजा इस मुकाम तक पहुँचे हैं।जब कि ना तो उनके कोई आर्थिक मजबूती का स्थायी समाधान है और नहीं उसमें उनका हस्तक्षेप है।वह आज भी सांगठनिक कार्यकर्ता के साथ लोगो से तेजी से कनेक्ट होने वाला जननेता हैं।

वह कार्यकर्ताओं के नेता हैं। राजनीतिक मौसम बदलने के साथ जिस तरह से लोगों की तेजी से आस्थाएं बदलती हैं सहजा वह अपवाद हैं जिन्हे कट्टर भाजपाई नेता का तमगा मिला है।बावजूद उन्हें अन्य विचारधारा और दल के लोग भी उतने ही सम्मान के साथ देखते हैं।

प्रधानमंत्री के आजमगढ़ कार्यक्रम की घोषणा के बाद भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार के लिए सफल आयोजन की जहाँ चुनौती है वह लोगो को यह विश्वास है कि सहजा मगहर की तरह आजमगढ़ को भी सफल बना देगें। यही कारण है कि जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह और जनपदीय टीम को लेकर सहजा कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने में लग गयें हैं।

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