कंक्रीट के जंगल कुर्बानी मांगते हैं..

वाराणसी में गिरता पत्‍थर

मैं कल जब यहाँ था
ठीक उसी समय
बस में सवारी करते हुए
कार चलाते हुए
बाइक से घर लौटते हुए
मैं वाराणसी में भी था
सुबह ऑफिस जाते वक्‍त बेटी ने कहा था
पापा शाम आज बर्थडे है मेरा
कैक लाना मत भूलना
लौटते वक्‍त मैंने कैक को
कार की पिछली सीट पर संभाल कर रखा था
कॉलेज के लिए निकलते वक्‍त माँ ने याद दिलाया था
बेटा लौटते वक्‍त दवाई लाना मत भूलना
वरना पूरी रात बीतेगी खांसते खरोसते हुए
लौटते वक्‍त मैंने दवाइयों को
बाइक के हैंडल पर लटका रखा था
आज सुबह लाठी के सहारे चलकर
पत्‍नी ने डबडबाई आँखों से कहा था
नाती-पोतों को ले आओ बड़ा मन है उनसे मिलने का
शाम को मैं, बस में अपनी पोती के संग घर लौट रहा था
आहिस्‍ता आहिस्‍ता
बाइक, कार, ऑटो और बसों में
गंगा किनारे सड़कों पर रेंग रही थी जिंदगियाँ
उस पल जिंदगी की रफतार धीमी थी
क्‍योंकि शहर में विकास की कलियाँ खिल रही थीं

अचानक गंगा के शहर में वज्रपात हुआ
विकास का एक पिल्‍लर
धम्‍म से जमीन पर औंधे मुँह गिर पड़ा
और नीचे दबकर खाकसार हो गई
बाइक, कार, ऑटो और बसों में रेंग रही ‍जिंदगियाँ
लिखने से पहले ही मिटा दी गई कई कहानियाँ
अनसुनी कर दी गई सारी प्रार्थनाएँ
जो गूंज रही थी ब्रिज के पास बने मंदिरों और मस्जिदों में

सड़क की दूसरी ओर एक पागल चिल्‍ला रहा था
कंक्रीट के जंगल कुर्बानी मांगते हैं….
कंक्रीट के जंगल कुर्बानी मांगते हैं…
मगर उसकी अवाज
क्रंदन, चित्‍कार और ट्रैफिक के शोरगुल में दब गई

किताबें पढ़ती दीमकें

होना तो चाहिए था
आइंसटीन से भी तेज
दीमकों का दिमाग
हर रोज चट कर जाती है
पूरी की पूरी किताब
चटकारे लेकर पढती हैं
जमीन के नीचे छुपाई हुई
मस्‍तराम की कहानियों को
तहखानों में संभाल कर रखी हुई
सविता भाभी की रसभरी बातों को
यहॉं-वहाँ बेरतीब से रखी हुई
कविताओं और हरे-भरे पन्‍नों को

कभी देखा है आपने
तस्‍लीमा या लैने की किताबों का
बॉयकाट करते हुए दीमकों को
अलग-अलग नजरों से देखते हुए
बेस्‍ट सेलर और रद्दी किताब को
दीमकें मन लगाकर पढती हैं
धार्मिक और धर्मविरोधी किताब को
आपसे, मुझसे कहीं आगे हैं दीमकें
वे न केवल पढ़ती हैं
बल्कि अपने भीतर समा लेती हैं
एक दिन में पूरी की पूरी किताब को

रचयिता –डॉ. ललित सिंह राजपुरोहित
संचार पता
डॉ. ललित सिंह राजपुरोहित
अधिकारी (राभा)
मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड,
कर्नाटक पोस्‍ट : कुत्‍तेतूर
वाया काटिपल्‍ला – 575 030
मंगलूरु कनार्टक

ईमेल पता
lalit_raj@mrpl.co.in&lalitcallingyou@gmail.com

शिक्षा
बीएससी, बीजे एमसी, एलएलबी, पीजीडीएचआरएम, एमए हिंदी, एमफिल, पीएचडी

प्रकाशित पुस्‍तकें
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