‘सूरज के छिपने तक’ : मौलिकता के मूल से मुलाक़ात

रविराज पटेल

परिलेख प्रकाशन, नजीबाबाद की नवीनतम प्रस्तुति ‘सूरज के छिपने तक’ एक सारगर्भित काव्य संग्रह है | मूलतः पटना निवासी कवयित्री रश्मि अभय द्वारा रचित एक सौ दो कविताओं का यह संग्रह कोई भी व्यक्ति के रूप में स्वयं को समझने की काव्यात्मक कोशिश है | वहीँ, यह संग्रह रचनाकार रश्मि की प्रमाणिक विशेषता की शुरुआत के रूप में भी देखा जा सकता है | विदित हो कि रश्मि की यह पहली प्रकाशित काव्य संग्रह है | वस्तुतः इस संग्रह में ज़िन्दगी से जूझती अधिकांश रचनाएँ कवयित्री की कल्पना मौलिक है, यह सिद्ध करता है | उदहारण के तौर पर ‘छोटी सी वो लड़की’, ‘ना जाने कैसी दुआ थी’, ‘ख़ुशी का एक पल’, ‘ऐसी क्या कमी थी’, ‘चलो अच्छा है’, ‘बस एक शब की बात है’, ‘ये कैसा प्यार’, ‘सुनो मैं जानती हूँ तुम्हारे अथाह प्रेम को’, ‘अजीब शख्सियत है उसकी’, ‘हर रात तेरे ख्वाबों में’ आदि शीर्षकों को उद्धृत किया जा सकता है | कुल मिला कर एक पठनीय संग्रह है ‘सूरज के छिपने तक’ |

आकाशवाणी नजीबाबाद के लोकप्रिय उद्घोषक एवं काव्य परख महानुभाव ताहिर महमूद द्वारा लिखित भूमिका में उल्लेखित ‘वियोगी कवि का यह प्रथम काव्य-संग्रह सापेक्ष है’ इस बात का परिचायक है कि ‘सूरज के छिपने तक’ पाठकों में पैठ बनाने की क्षमता है | बशर्ते पाठकों के पहुँच में हो |

– सूरज के छिपने तक (काव्य संग्रह)

– कुल कविताओं की संख्या : 102

– रचनाकार : रश्मि ?अभय?

– प्रकाशक : परिलेख प्रकाशन, नजीबाबाद

– ISBN : 978-81-925436-42

– मूल्य : 75 रूपये

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