जो रोकना हो इनकी उड़ानों को/ ऊॅचे कर लो आसमानों को

 

राजेशचंद्र मिश्र 

आजमगढ

जी हां! आधी आबादी की उड़ानों को रोक पाना आज किसी के बुते की बात नहीं है। कल तक देहरी की दहलीज तक सिमटी नारी आज ऊॅचे आसमानों और बेडियों की सरहदों को पार कर, निड़रता से परवाज़ कर रही है। वह महलों की ज़ीनत से युद्ध की नायिका भी बन रही है। वह घरों से सरहदों तक की हिफ़ाजत कर रही है। वह चुल्हे से लेकर पुलिस कप्तान तक की जिम्मेदारी निभा रही है। क्यों कि वह हमारी माॅ है, बहन है, पत्नि है, और सबसे बढकर हमारी अस्मत और पहचान है, जिसके अधिकारों को लेकर साहित्य से लेकर समाज तक, तमाम विमर्श छिडे हुएं हैं।
ऐसी ही परिस्थितियों में समय की रेखा पर पदचाप बनाती एक महिला पुलिस कप्तान हैं ‘अजुंम आरा’। जिन्हें सुन्नी ज़मात की पहली महिला आईपीएस होने का खिताब मिला है। उ.प्र.की साहित्यिक भूमि आजमगढ़ के मेहनगर इलाके की रहने वाली अंजुम, आज हिमाचल प्रदेश के ‘सोलन’ जिले में पुलिस कप्तान हैं। धुन की पक्की अंजुम, बर्फ की इन हसीन वादियों में अपने टैलेंट का ही झंडा नहीं गाडा, बल्कि देश की लाखों महिलाओं और लड़कियों के लिए एक रोल माॅडल बनकर भी उभरी हैं। अंजुम उन चुनिंदा मुस्लिम लड़कियों में शुमार हैं जो अपने सपनों को अंजाम तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोडतीं और सफलता स्वयं आकर पूछती है ‘बता तेरी रज़ा क्या है’। उनको लेकर पूर्व में भी खबरे छपती रही हैं लेकिन इन दिनों अंजुम एक बार फिर सुर्खियों में हैं, ‘अपने नये प्रयोग को लेकर।’ प्रयोगधर्मी अंजुम सन-1861 के पुलिस एक्ट से बाहर निकलकर भी सोचती हैं… बल्कि करती भी हैं। सोलन, देश का पहला जिला है जहां अंजुम ने अपने सोच और कौशल से पुलिस को उसकी इमेज से बाहर निकालकर ‘मित्र-पुलिस’ बना दिया है। इस प्रयोग को अंजाम तक पहुॅचाने में अंजुम ने तकनीक का भरपूर प्रयोग किया। उन्होंने मोबाइल के प्रयोग को सार्थक बनाते हुए अपराध पर अंकुश लगाने का काम किया है और व्हाट्सअप पर मुकदमा लिख कर, संभवतः देश में पहली बार इसको जनमानस के लिए शुरूआत कर दी।
अपने इस नये प्रयोग के बारे में बताते हुए 2011 बैच की युवा आईपीएस अधिकारी अंजुम कहती हैं कि- ‘सोलन जिले में करीब 158 पंचायते हैं। गांव से शहर का रास्ता काफी दुर्गम है। ऐसे में सभी का पुलिस तक पहुँच पाना या यूँ कहें कि जिला मुख्यालय तक पहुँच पाना जरा दिक्कत का काम होता है।’ ऐसे में हमने ‘संवाद और सहायता’ नाम से दो ग्रुप बनाये और इससे पूरे इलाके को जोड़ने का काम किया। अंजुम ने बताया कि कोई भी व्यक्ति 98173300200 पर अपनी शिकायत को संदेश, तस्वीर या फिर वीडियो के द्वारा दर्ज करा सकता है जिसे एफआईआर के रुप में लिया जायेगा। शिकायत मिलने के बाद पुलिस के अधिकारी इसकी जाँच करेंगे कि शिकायत कंजेबुल अफेंस है या नहीं और फिर उसके अनुसार ही मुकदमा संबंधित धारा में लिखा जायेगा। इसकी निगरानी मेरे द्वारा स्वंय किया जाता है और पीड़ित व्यक्ति की शिकायत को उसके संबंधित थाना क्षेत्र को भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में सिर्फ 6 पुलिसकर्मियों को इस ग्रुप का एडमिन बनाया गया है।
सबसे अहम बात ये कि सिर्फ अपनी शिकायत ही नहीं, यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ भी कोई शिकायत है तो उसे भी इस पर बताया जा सकता है। संबंधित व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखा जायेगा। ‘सहायता और संवाद’ नाम से बने इस ग्रुप की पूरे क्षेत्र में काफी प्रशंसा हुई और आधिकारिक तौर पर इसे लाॅचिंग भी किया गया। व्हाट्सअप पर साझा हुई जानकारी या शिकायत को कार्यवाही या मुकदमे के रुप में बदल कर काम करने की इस नयी शुरुआत के साथ हिमाचल प्रदेश का सोलन जिला अपनी तरह का पहला जिला पूरे देश में बन गया है। अंजुम कहती हैैं कि ये नया दौर तकनीक का है। सोशल मीडिया की पहुँच चारों तरफ है और इसका सदुपयोग सही मायने में इसी तरह किया जा सकता है।
दरअसल, सोलन जिला, मादक पदार्थों की तस्करी के लिए भी जाना जाता है और ऐसे में बात अहम है कि पुलिस का सूचना तंत्र भी काफी मजबूत हो। ऐसे में ये दोनों ग्रुप पुलिस के लिए काफी अहम साबित होंगे। आम आदमी भी बिना किसी भय के कोई भी सूचना यहाँ दे सकता है।
सोलन की पहली महिला एसपी अंजुम
अंजुम आरा के नाम सिर्फ पहली सुन्नी जमात से मुस्लिम महिला अधिकारी होने का रिकार्ड नहीं है। अंजुम हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक होने का गौरव भी हासिल किया है। इसके पहले सोलन जिले में किसी महिला पुलिस अधिक्षक की तैनाती नहीं हुई थी। बताते चले कि अंजुम ग्रामीण परिवेश से निकली लड़की है, जिसकी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से हुई और बाद में लखनऊ से उच्च शिक्षा हासिल किया। बकौल अंजुम अपनी पूरी सफलता का श्रेय अपने परिजनों को देती हैं। आज भी अपने को अब्बु की बेटी मानने वाली अंजुम कहती हैं जिस दिन मेरा चयन हुआ मेरे वालीदान बहुत खुश थे। ये एहसास कुछ ऐसा था जैसे एक नाविक लहरों को चीरते हुए कश्ती को किनारे तक पहुँचा दे।


आईएएस है अंजुम के शौहर
आईपीएस में चयन होने के बाद अंजुम को मणिपुर कैडर मिला था। शुरुआती दिनों में वहाँ पर भी उन्होंने चुनौतियों को बखूबी अंजाम दिया। बाद में अंजुम का निकाह 2010 बैच के आईएएस अधिकारी डाॅ. युनूस से हो गया, जिनका कैडर हिमाचल प्रदेश था। निकाह के बाद अंजुम का कैडर बदल गया और उन्होंने हिमाचल प्रदेश ज्वाइन कर लिया। डाॅ. युनूस हिमाचल प्रदेश में कुल्लू जिले के डीसी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *