अखिल!‘आई हेट यॅू‘/ डाॅ0 अखिलेश चन्द्र

मम्मी  के बार बार मना करने के बावजूद प्रिया ने अपना फेसबुक प्रोफाइल नहीं बदला, मम्मी ने जब मना किया तो चिढ़ते हुए प्रिया बोेली ’’क्या ममाॅ आप भी न , अपनी पुरानी सोच को अपडेट नही करती , ज़माना रोज का रोज अपने को अपडेट कर रहा है और एक आप है कि अब भी तीस वर्ष पहले की सोच के साथ जी रही हैं ’’ इस बात पर मम्मी तिलमिलाते हुए बोली – ’ क्या मतलब हैं तेरा ? तीस वर्ष से क्या तात्पर्य हैं तुम्हारा ? प्रिया ने कहा ’ तीस वर्ष से मेरा तात्पर्य यह हैं मेरी प्यारी ममाॅ ! जब आपकी शादी हुयी थी, आपको तो लगता है यह भी भूल गया है , हैं न ! ममाॅ ने कहाॅ ’ हाॅ ! अब तुम इतनी बड़ी हो गयी हैं कि मुझे मेरी शादी के पल याद दिलायेगी ! प्रिया ने कहाॅ – नही ममाॅ ! शादी के पल की जो सोच आपकी थी, वो समय याद दिलाना चाहती हूॅ उस समय की एक युवती का भावपक्ष याद करो, वो चंचलता याद करो, एक अनमैरिज्ड लड़की की कौतुहलता को याद कराे, मेरा मतलब सिर्फ इतना था ममाॅ ! मैं तुम्हे यह याद दिलाना चाहती थी कि आप शादी के बाद नाॅलेज की दृिष्ट से अपडेट नही हो रही हो और दुनियाॅ प्रतिपल अपडेट हो रही है और मैं नये ज़माने की लड़की हूॅ । फेसबुक प्रोफाइल पर अच्छी फोटो रहती है तो दोस्त अच्छे बनते है । तुम तो जानती हाे, दुनियाॅ अच्छी सोच और अच्छे चेहरे को पसन्द करती है, अच्छे चेहरे के कारण ही तो आपने पापा को और पापा ने आपका चयन किया था ।

ममाॅ और प्रिया की नोक – झाेेक चल ही रही थी, तभी पापा ने प्रिया को पुकारा – प्रिया वो प्रिया !’ प्रिया तेजी से पापा के कमरे की तरफ गयी और बोली ’ क्या पापा ’? पापा ने कहा ’क्या बात है प्रिया ? किस बात पर बहस हो रही थी ? प्रिया ने कहा- कुछ नही पापा वो मेरे और ममाॅ के बीच की बात थी ? पापा ने कहा कुछ विशेष हो तो बताओ प्रिया ने कहा पापा ममाॅ चाहती है कि मैैं अपना फेसबुक प्रोफाइल अपडेट न किया करूॅ, जबकी मुझे अपडेट किया करना अच्छा लगता है । पापा ने कहाॅ -‘ठीक है बेटा, मै तुम्हारी ममाॅ को समझा दूॅगां ।‘

 

अब क्या था, प्रिया को लगा पापा मेरे नई सोच से सहमत हैैं और ममाॅ को समझा लेेंगे प्रिया को पापा का सपोर्ट मिल जाने के कारण उसका विदांस व्यक्तित्व और निखरने लगा उसने पापा से कहा- ’पापा आप मेरा नेटपैक बैैंक जाते वक्त डलवा दिजिएगा ।‘

प्रिया के पापा नई दिल्ली में बैंक में ब्रान्च मैनेजर हैं और प्रिया उनकी इकलौती संतान । प्रिया ने उच्च शिक्षा संस्थान से पोस्ट ग्रेजुएसन की शिक्षा ग्रहण की हैं । पी0 जी0 में टाप करने पर पापा ने उसे लैपटाप उपहार मेें दिया हैं, जब से लैपटाप घर मंे आया है, प्रिया और ममाॅ की नोक झाेक अक्सर हो जाती हैं, । ममाॅ चाहती है कि वह आनलाइन ज्यादा न रहे, जबकी प्रिया यह चाहती है कि जाॅब और दूनियाॅ की जानकारी के लिए आनलाईन रहना जरूरी है ।

प्रिया, को जाॅब की दरकार है वो नित नये नये रोजगार की साईट देखती रहती हैं । उसने अपना रिजूम बनाकर फेसबुक पर अपडेट कर दिया । प्रिया को मम्मी ने अपनी तरफ से यह हिदायत दे रखी थी कि वो फेसबुक पर जो दोस्त बनायेगी उनमें सिर्फ और सिर्फ लडकियां होगीं क्याेेंकि ममाॅ ये चाहती थीं कि वो अपना कीमती समय ज्यादा नष्ट न करें ।

प्रिया, ममाॅ की बातो का ध्यान भी रखती थी परन्तु एक दिन अचानक उसके नये प्रोफाइल को देखते ही अखिल ने लाईक भेज दी । अखिल की लाईक पर प्रिया ने सोचा यूॅ ही कोई लाईक कर दिया होगा । पर अखिल ने यूॅ हीं, लाईक नही किया था उसकी सोच प्रिया के सम्पर्क में आने की थी । जैसे ही प्रिया ने लाईक पर धन्यवाद अ
खिल को फेसबुक पर किया । अखिल ने लिखा‘- टेल मी एबाऊट योर सेल्फ ।‘

प्रिया ने अब ईधर से लिखा‘- हाय! आई एम प्रिया ।‘ आई कम्पलीट माई पी0 जी0 जस्ट नाऊ, आई वान्ट ए जाॅब एण्ड माई रिजूम इज हियर।‘
अखिल ने लिखा‘- हाय! हैब यू वेरी इन्टेलिजेन्ट माइन्ड । विथ रिगाडस्, आई मस्ट हैब यूॅ दैट, यू आर जस्ट व्यूटी विथ ब्रेन पर्सनालिटी । आई हेल्प यू फार द बेस्ट इन द फिल्ड आफ जाॅब ।‘

प्रिया ने सहजता बरतते हुए लिखा- ’हम क्याेें अनावश्यक अंंग्रेजी  में बात कर रहे हैं क्याेें न हम हिन्दी में विचारो का सम्प्रेषण करें ।‘ प्रिया को लगा जाॅब के लिए मेरी मदद करने वाला मुझे मिल रहा हैं तो औपचारिकता की क्या जरूरत ? अखिल ने लिखा- हाॅ क्याेें नही ? हिन्दी मे मंै भी सहज अधिक हूॅ ।

दोनाेें का विचार फेसबुक पर अब हिन्दी में होने लगा । ममाॅ जब भी पूछती कि तुम्हारा कोई दोस्त फेसबुक पर पुरूष तो नही है, तो प्रिया कहती ’नही ममाॅ तुम नाहक ही परेशान रहती हो । ’एक दिन अखिल ने फेसबुक पर लिखा‘- प्रिया मैं तुमसे मिलना चाहता हूॅ, मैैं अपनी कम्पनी की एक मीटिंग के सिलसिले में नई दिल्ली आ रहा हूॅ । क्या तुम मुझसे मिल सकती हो ? प्रिया ने सोचा, यही सही समय है अखिल से मिलकर अपने जाॅब की बात शेयर करूॅगी तो उसकी सही मद्द हो जायेगी । इन्हीं बाताेें को ध्यान में रखकर प्रिया ने अखिल से मिलने की सहमती देते हुए लिखा‘- अखिल मैैं तुमसे मिलने के लिए उत्साहित हूॅ अपना आने का दिन , समय और स्थान बताआ, जिससे हमारी मुलाकात सम्भव हो जाय ।‘

अखिल ने अपना नई दिल्ली का पूरा प्रोग्राम प्रिया को पोस्ट कर दिया फिर क्या था, प्रिया का उत्साह देखने लायक था। अभी अखिल को नई दिल्ली आने में एक सप्ताह बाकी हैं पर उसे लगा यह एक सप्ताह कैसे बीतेगा । उसके कानों में अचानक एफ एम पर बज रहा किशोर कुमार का गाना जिन्दगी एक सफर है सुहाना, यहाॅ कल क्या हो किसने जाना सुना
यी पड़ने लगा । प्रिया को लगा अखिल के आने से अब उसे नौकरी मिल जायेगी ।

प्रिया की चंचलता उसके न चाहने पर भी उसके चेहरे पर झलक रही थी, वह किचेन में काम कर रही ममाॅ के पास गयी और बोली- ममाॅ क्या कर रही हो ? ममाॅ ने कहाॅ -बेटी हम औरताेें का क्या ? दिनभर खाने के प्लान के बारे मे सोचती रहती हैं, सुबह शाम का नाश्ता हो गया तो दिन का भोजन, दिन का भोजन हो गया तो शाम का नाश्ता हो गया तो रात का भोजन, । इस समय रात्रि भोजन की प्लानिंग चल रही हैं । प्रिया ने कहा-’ ओके ममाॅ ! आज रात्रि का भोजन मैैं बनाऊ ।‘

ममाॅ को लगा कि प्रिया में अचानक बदलाव क्यॅू लग रहा है ? क्या ये वही प्रिया है जिसे खाना परोसने के बाद भी चार बार बुलाना पड़ता है । आज वही प्रिया रात्रि भोजन बनाने की बात कर रही है । क्या आज सूरज पश्चिम में नही पूरब में ढूबा है क्या ? तभी प्रिया ने माॅ को झकझोरा, ममाॅ आपने कुछ बताया नही ! ममाॅ ने कहा‘- क्याेें नही बेटा आज तुम ही बनाओ ।‘ पर मुझे यह बताओ तुममे यह बदलाव कैसा ? प्रिया ने कहाॅ -कुछ नही ममाॅ बस ऐसे ही ।

ममाॅ प्रिया के चेहरे पर आयी खुशी की झलक आसानी से पढ़ रही थी, प्रिया का बाॅडी लैग्वेज अलग से झंकृत हो रहा था , तभी प्रिया किचन से तेजी से बाहर आयी और अपने मोबाईल को ईयर फोन से जोड़ते हुए ईयर फोन को कान पर लगाया और म्यूजिक प्ले मे जाकर न जाने क्यू लता मंगेशकर का गाया गाना बजाया‘, मेरे ख्वाबो में जो आये, आकर मुझे छेड़ जाये उससे कहो कभी मेरे सामने तो आये, मेरे ख्वाबो में……………!

प्रिया प्यार भरा यह गाना जरूर सुन रही थी पर इस गाने को अपनी जिन्दगी से जोड़ कर नही देख रही थी उसका मन इस समय प्रफुल्लित सिर्फ इसलिए है कि शायद उसे जाबॅ का रास्ता अखिल के थ्रू मिल जाय ।

धीरे- धीरे एक सप्ताह बीत गयाॅ और आज अखिल के दिल्ली आने का दिन है । प्रिया ने ममाॅ से कहाॅ- ‘ममाॅ आज कुछ देर के लिए बाहर जाऊॅगी, मेरी एक सहेली के यहाॅ उसने मुझे बुलाया है । ममाॅ ने कहा – जिसने तुम्हे बुलाया है क्या मैैं उसे नही जानती ? प्रिया ने कहाॅ नही ममाॅ । आप उसे नही जानती, वो मेरी फेसबुक दोस्त है, हो सकता है मुझे आने में थोड़ी देर हो , तुम घबराना नही, मैं आ जाऊॅगी । ममाॅ ने कहा

-‘तुम मुझे उसका मोबाईल नम्बर दे दों प्रिया ने कहा‘- ममाॅ आप टेंशन मत लो, मैैं आ जाऊॅगी ।‘

ममाॅ को लगा कि प्रिया नम्बर भी नही दे रही है और साथ में यह भी कह रही है कि आप टेंशन मत लो, अरे ! जवान लड़की कही जा रही है, सहेली का नम्बर भी नही दे रही हैं, आने का कोई टाईम भी सही नही बता रही हैै, उस पर कह रही है, टेंशन मत लो’ जवान लड़की, वो भी दिल्ली जैसे शहर मेें, जहाॅ निर्भया जैसा काण्ड हुआ, सुनकर ही रोगंटे खड़े हो जाते है । आजकल की लड़कियाॅ कितने आसानी से कह देती है ममाॅ आप टेंशन मत लो, मेरा टेंशन ये क्या जाने ? जिस दिन ये माॅ बनेगी उस दिन पूछूॅगी, जब इसका बेटा/बेटी ऐसी परिस्थिति में धर से जायेगा और कहेगा/ कहेगी, ममाॅ । आप टेंशन मत लो ।

खैर ममाॅ की परवाह किये बिना अखिल के बताये पते पर प्रिया समय से पहुॅच गयी अखिल भी उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था । प्रिया को देखते ही अखिल ने कहा ’ हेलो प्रिया तुम तो वास्तव में बडी फोटोजेनिक हो, फेसबुक की प्रोफाइल से भी ज्यादा सुन्दर ! प्रिया ने कहा ऐसी सुन्दरता का क्या फायदा ? जब तक एक अच्छा जाॅब न मिल जाय , जाॅब मिल जाय तो इसका कोई मतलब बने ।

अखिल ने कहा कैसी जाॅब चाहती हो़ ?, सरकारी या प्राईवेट । प्रिया ने कहा -आजकल तो सभी सरकारी जाॅब ही चाहते है, पर सरकारी जाॅब इतनी आसान कहाॅ है ?आप मुझे कोई प्राइवेट जाॅब ही दिलवा दें, हाॅ मेरी शर्त सिर्फ इतनी है कि मै जाॅब दिल्ली में ही लूॅगी ।

अखिल ने कहाॅ ठीक है प्रिया मैं जिस कम्पनी मे काम कर रहा हॅू उसी कम्पनी में मैं तुम्हारे लिए बात करता हॅू तुम अपना रिजूम फोटो सहित मुझे दे दो, आज मेरी मुलाकात एम. डी. साहब से होगी, मैैं बात करूगा । अच्छा ये बताओ, तुम क्या लोगी, चाय काफी या ठण्डा । प्रिया ने कहा नही कुछ खाने या पीना की इच्छा नही हैं । अखिल ने कहा- ऐसे कैसे हो सकता है, मेरी आपसे पहली मुलाकात है, देखो कुछ तो लेना ही पड़ेगा, सुनो! मेरे पास अभी आधा धण्टा शेष है, चलो पास मे ही एक अच्छा ! कैन्टीन है कुछ साथ मे खा लेते हैं ।

प्रिया के न चाहने पर भी अखिल ने फोर्स किया तो प्रिया उसके साथ चली गयी । उस समय सुबह के साढ़े दस बज रहे थे इसलिए थोडी नाश्ते की तलब तो प्रिया को भी थी । कैन्टीन पहुचॅने पर अखिल ने कहाॅ क्या खाओगी प्रिया ?। प्रिया ने कहा डोसा और काफी सुनो, । वेटर को बुलाते हुए अखिल ने कहा सुनो दो स्पेशल डोसा तथा दो काफी ले आओ और देखो, थोडा जल्दी लाना क्योकि हमें निकलना हैं । वेटर ने कहा जी साहब अभी लाया ।

जब तक नाश्ता आता तब तक अखिल ने प्रिया से कहा- प्रिया आज शाम तक उम्मीद हैं एम. डी. साहब से बात करके मैं तुम्हारी समस्या का कोई न कोई हल निकाल लॅूगा, तुम क्या शाम को मुझसे मिल सकती हो? हो सकता है एम. डी. साहब तुमसे मिलना चाहें । प्रिया ने कहा- शाम को आप फोन कीजिएगा मै पापा के साथ आ जाऊॅगी । अखिल ने कहाॅ पापा के साथ क्यॅू ?। तुम अकेले नही आ सकती क्या ? प्रिया ने कहा- नहीं पापा शा
म को अकेले नही आने देेंगे । अखिल ने कहा- कोई बात नहीं जैसा होगा तुम्हेें बताऊॅगा ।

नाश्ता करने के बाद अखिल ने प्रिया से कहा -अच्छा प्रिया अच्छा तो नही लग रहा है पर मुझे अब निकलना होगा क्योकी मेरी मीटिग का टाईम हो रहा है । प्रिया ने कहा- ठीक है । मैं शाम को आपके फोन का इंतजार करूॅगी ।

प्रिया के चले जाने के बाद न जाने क्यूॅ अखिल प्रिया को मन ही मन चाहने जैसा सोच रहा था , वो सोच रहा था कि वो उसका आकर्षण है या उसके जाॅब दिलाने की भावना , पर ये जरूर सोच रहा है कि एम. डी. साहब से बात करके उसकी मदद करेगा, अपनी मीटिंग का काम निपटाने के बाद उसने एम.डी. साहब को प्रिया का रिजूम देते हुए बोला – सर दिस लेडी इज मच मोर टैलेन्टेड, प्लीज विथ माई रिक्वेस्ट, गिव ए जाॅब अपारचुनिटी इन दिस आफिस ।‘ एम.डी. सर ने कहा -ओके आई वान्ट ए लेडी टू विकाज ए लेडी कैन हैण्डिल वेटर द पोस्ट आफ रिसेप्टनिस्ट एण्ड इन दिस आफिस द रिसंप्शनिस्ट पोस्ट इज वेकेन्ट प्लीज कानटैक्ट दिस लेडी एण्ड आलसो मीट टू मी टूडे । अखिल ने कहाॅ ओके सर आई विल मैनेज टू मीट टूडे । थैैंक्स सर ।

अखिल ने प्रिया को फोन किया, प्रिया! एम.डी. साहब तुमसे मिलना चाहते हैं, तुम पापा को लेकर कम्पनी आ जाओ । प्रिया, पापा को लेकर साप कम्पनी पहुॅची और एम.डी. साहब ने सारे काम बताते हुए उसे नौकरी पर रख लिया ।

प्रिया की जिन्दगी में अब बदलाव आ गया उसे नौ बजे से शाम पाॅच की ड्यूटी मिल गयी। पापा उसे बैैंक जाते कम्पनी छोड़ देते हैं और शाम लौटते वक्त ले लेते हैं । दिनभर की व्यस्तता में भी प्रिया अखिल से फेसबुक पर जुड़ी रहती है । उसने अखिल को फेसबुक पर लिखा ’’ मैं आपका यह एहसान जिन्दगी भर नही चुका सकती ’’ ।

फिर क्या था ? प्रिया धीरे धीरे मन ही मन अखिल को चाहने लगी और उसने अखिल से पूछा क्या आप अभी सिंगल हो ।‘ अखिल ने कहा हाॅ क्यू प्रिया ने कहा बस ऐसे ही पूछ लिया । अखिल के हाॅ कहने से प्रिया के मन में प्यार की उम्मीदेें और बढ़ने लगी । एक शाम आफिस से निकलने के टाईम पापा का फोन आया , प्रिया आज मुझे आने में थोड़ा देर हो जायेगी, तुम इंतजार करो मै आ रहा हूॅ ।

प्रिया ने सोचा चलो अखिल से बात कर लेती हूॅ उसने अखिल को फोन किया और कहाॅ ‘-अखिल क्या कर रहे हो‘ ? अखिल ने कहा- कोई खास नही, तुम बताआे, आफिस से निकल गयी कि नहीं ? प्रिया ने कहाॅ अभी नही, पापा लेने आने वाले हैैं, उन्ही का इंतजार कर रही हूॅ । अखिल ने कहा- प्रिया मै तुमसे कुछ बात करना चाहता हूॅ ।‘ प्रिया ने कहा- मै भी तुमसे कुछ बात करना चाहती हूॅ । पर फोन पर नही , दिल्ली कब आने वाले हो , मिलोगे तो बताऊगी, अभी नही । अखिल ने कहा -ठीक है कुछ खास हो तो अभी बता सकती हो । प्रिया ने कहा- नही मिलेगे तभी बताऊॅगी । तभी प्रिया के पापा उसे लेने आ गये उसने कहा अच्छा अखिल पापा आ गये हैैं मैैं तुमसे बाद मेें बात करूॅगी ।

प्रिया, धीरे -धीरे अखिल के प्यार मे आगे बढ़ रही थी, अखिल भी धीरे धीरे उसे नजदीक आता महसूस करने लगा था, वो चाहता भी था कि प्रिया अपने दिल की बात बता दे, पर प्रिया ने ऐसा नही किया ।

अखिल को लगा, प्रिया उसे कही न कही लगता है, चाहने लगी है, क्योकि वो कुछ कहना चाह रही है पर फोन पर बताना नही चाहती, वो मिलने को इच्छुक है, इसका मतलब आसानी से समझा जा सकता है । अखिल ने एक बार फिर दिल्ली का प्रोग्राम बनाया और प्रिया को प्रोग्राम बताकर दिल्ली आ गया । दिल्ली में प्रिया और अखिल काफी धुल- मिल गये थे। इस बार अखिल कम्पनी का काम कई दिनो का लेकर दिल्ली आया था । कम्पनी में भी अखिल और प्रिया की चर्चा जोर पकड़ रही थी, लोगाेें को लगने लगा था कि ये प्रमी जोड़ा एक न एक दिन शादी की दहलीज तक पहॅुच जायेेंगे । प्रिया ने भी अपनी तसल्ली के लिए कम्पनी के कर्मचारियाेें की बायोडाटा प्रोफाइल पर भी अखिल का बायोडाटा चेक भी किया था उसने अपने मैरिड या अनमैरिड वाले कालम में अनमैरिड ही भरा था, उसे लगा की

प्रिया ने कहा ममाॅ मैं अखिल को चाहने लगी हूॅ आप तो उससे नही मिली हो शाम को धर बुलाती हूॅ, आप तथा पापा दोनों देख लो ! ममाॅ ने कहाॅ- ठीक हैं बेटा तुम्हेें पसन्द है तो ठीक ही होगा । शाम को प्रिया ने अखिल को घर बुलाया, सभी ने साथ मेें खाना खाया परीवारिक स्तर की बहुत सी बाते हुयी और अखिल ने भी खूब इन्जाव किया और कहाॅ -अंकल मैैं आप सब से मिलकर बहुत खुश हूॅ, प्रिया तो दिनभर आप लोगाेें की बात करती हैै आप दोनों का बडा ख्याल रखती है । बहुत ही संवेदनात्मक भावना है इसकी ।‘

हाॅ बेटा ! हमारी तो एक ही संतान है, प्रिया, बस इसकी एक अच्छी सी शादी कर देें, तो हम भी गंगा स्नान जैसा सुख पा जाते ।
दूसरे दिन शाम को काम खत्म करने के बाद अखिल ने प्रिया को कम्पनी से साथ लिया और कहा – प्रिया अपने पापा को फोन कर दो कि तुम आज मेरे साथ धर जाओगी मैैं तुम्हें छोड़ दॅूगा । प्रिया ने ऐसा ही किया । दोनों साथ में खाना खाने की गरज से एक कैंटिन में गये । खाना आर्डर के बाद प्रिया ने कहा – अखिल आई रियली लब यूॅ क्या तुम मुझसे शादी करोगे । अखिल ने कहा हाॅ प्रिया। पर अभी नही मेरी एक बडी बहन है जिसकी जिम्मेदारी मेरे ऊपर हैं । प्रिया को लगा अखिल सही कह रहा है । पर अखिल ने बातों- बाताेें में प्रिया से कहा‘- प्रिया अगर तुम चाहो तो शादी के पहले हम लिव इन रिलेशन में रह सकते हैं क्यांेकि आफ्टर आॅल बहन की शादी के बाद तो हमें शादी करनी ही हैं । अभी प्रिया उधेडबुन में ही थी, वो सोच रही थी कि नही लिव-इन रिलेशन तो कत्तई नही, ममाॅ तो मुझे मार ही डालेगी , नहीं, लिव इन रिलेशन नहीं तो नही ।

तभी अखिल को बाथरूम जाने की जरूरत लगी और वो बाथरूम चला गया । हाॅ जाते समय उसका मोबाइल वही रह गया । अखिल के मोबाइल पर फोन आने लगा, प्रिया ने फोन उठाया और कहा हैलो आप कौन ? उधर से आवाज आयी हैलो आप कौन ? प्रिया ने कहा जी मै प्रिया बोल रही हूॅ, उधर से आवाज आयी कौन प्रिया ? प्रिया ने कहा- जी मंै अखिल के साथ काम करती हूॅ, आप कौन? उधर से आवाज आयी जी मैं अखिल की पत्नी, सोनी बोल रही हूॅ, वो आये तो कह दीजिएगा, उनकी बेटी रिया की तबियत खराब है जल्दी घर पहॅुचे । अच्छा मैं हास्पिटल जा रही हूॅ आप बोल दिजिएगा । प्रिया ने कहा जी अच्छा ! तब तक वेटर खाना लगा चुका था । जैसे ही अखिल बाथरूम से आया प्रिया नें अखिल सें बताया सोनी आपकी पत्नी का फोन था ? और आपकी बेटी रिया की तबियत बहुत खराब है । ये बताना जरूरी था । सो बता दिया । यार प्रिया ! मै बताना चाहता था, पर, कह नही सका, अच्छा खाना तो खालो ! प्रिया ने अपना हाथ झटकते हुए अखिल के हाथ से छुड़ाया और तेजी से चिल्लाते हुए बोली ’अखिल!‘‘ आई हेट यूॅ ’’

 

असि0 प्रो0 शिक्षक प्रशिक्षण विभाग
श्री गाॅधी पी0 जी0 कालेज मालटारी
आजमगढ़
पता:- म0 न0 466 राहुल नगर (पं0 हरिवंश मिश्र कैंपस)
मंडया आजमगढ़ 276001
मो0 9415082614

Email – shodhamrit@gmail.com

5 thoughts on “अखिल!‘आई हेट यॅू‘/ डाॅ0 अखिलेश चन्द्र

  1. यह कहानी नई पीढी के बच्चों के लिए एक सबक है ।बच्चे युवा होने के नाते भावनाओ मे बहकर बडी गलती कर सकते है ।कहानी में प्रिया एक फोन काल से बच जाती है नही तो उसकी जिन्दगी जहन्नुम बन सकती थी।माता पिता की सोच सदा बच्चो के हित के लिए होती है।कहानी मे दो पीढीयो के द्वन्द्व को सही तरीके से बुना गयाहै।अखिल को युवा की गन्दी सोच के दिखाकर युवा के भौतिकवादी सोच को उभारा गया है।

    1. यह कहानी युवाओ एक सीख देने वाली है। such a very nice story

  2. सच से वाबस्ता बेहतरीन उद्गार जो आज की आभासी दुनिया के खतरे से हमें सचेत व जागरुक करता है।

  3. बेहतरीन कहानी। इस कहानी का अंत ज्यादे मजेदार लगा के समय से पहले प्रिय को हकीकत पता चल गई।

  4. धन्यवाद रश्मि एवं अनूराग सिह जी।

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