तेरे हाथों में पहना कर चूड़ियां, मौज बंजारा ले गया/अर‍विंद कुमार सिंह

शार्प रिपोर्टर डॉट इन

फिरोजाबाद। यू तो यह शहर चुड़ियों का नगर, यानि सुहागनगरी के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है,जहां के एक मुहल्ले का नाम भी सुहागनगर है। लेकिन पिछली सरकार में प्रोफेसर रामगोपाल यादव और उनके पुत्र अक्षय यादव का राजनीतिक क्षेत्र होने के कारण यह विशिष्ट जिला रहा। जहां सिर्फ प्रोफेसर और उनके बेटे की चलती थी।
बताते हैं कि देश भर में कांच के सामान और चुड़ियों के लिए विख़्यात फिरोजाबाद की समृद्धि के कभी मिसाल दिये जाते थे। 500 से ज्यादा चुड़ी कारखानों से निकलता धुँआ यहां से 40किमी दूर आगरा के ताजमहल की रंगत को भले फीकी करता रहा हो,लेकिन यही धुँआ, डेढ़ लाख परिवारों के चेहरों पर खुशियाँ बिखेरता था। यह संख्या सिर्फ फिरोजाबाद की ही नहीं होती थी बल्कि इटावा,जसवंतनगर,मैनपुरी,बेवर,एटा,शिकोहाबाद आदि क्षेत्रों के मजदूर यहां सुबह आते और दिन भर दिहाड़ी करने के बाद शाम को अपने घर चले जाते।

आज इन कारखानों की संख्या घट कर 250 तक रह गयी है और मोटे असामियों (सेठों)की संख्यां बढ़ गई है। उनके बढ़ने के साथ यहां मजदूरों के शोषण का अंतहीन सिलसिला क्या शुरू हुआ? वह आज भी बदस्तूर जारी है। बताते हैं कि एक कारखाने में,एक चुड़ी के बनने में,वह 20 से 21 हुनरमंद हाथों से गुजरती है। तब जाकर वह फैंसी कारीगरों के हाथों चमकदार और खूबसूरत रंगत में ढ़लती है। लाल, पीली और हरी चुड़ियों की चमक और नक्काशी , ना जाने कितनी माँओ और बेटियों को टी.वी.और असाध्य रोगों के आगोश में भेज देती है यह कोई नहीं देखता,बल्कि सभी उन चुड़ियों की रंगत और खुबसूरती निहारते हैं।

सरकार ने भले ही इसे सुहाग का आभूषण होने के कारण करमुक्त रखा हो,लेकिन उसकी नीतियां,यहां कार्यरत मजदूरों के जीवन को शोषणमुक्त नहीं कर सकी, बल्कि असामियों(सेठो)के लिए बेहतर योजना बनाती रहीं, क्योंकि इन्हीं असामियों और उनके चंदों के बल पर राजनीतिक दल चलते रहें हैं।


चूड़ियों के बारे में बताया जाता है कि फिरोजाबाद निवासी कोई कारीगर ईस्ट इंडिया कंपनी में नौकरी करता था।अंग्रेजों ने अपनी खूबसूरत मेमो(महिलाओ) के लिए चुडि़यों का एक नक्शा बनवाया जिसमें तरह तरह की आकार और नक्काशी की डिजाइन थें,उस कारीगर ने उस नक्शे की नकल तैयार की और सीधे फिरोजाबाद आकर कारखाना खोल दिया और उसकी नकल में अनेक कारखानें खुल गये।उस हुनर को व्यापार बनते देर नहीं लगी और बालीवुड ने अनेक गीतों में चूडियों की महत्ता और खुबसूरती को स्वर दिया..। तेरे हाथों पहना कर चूडियां…,

 

2 thoughts on “तेरे हाथों में पहना कर चूड़ियां, मौज बंजारा ले गया/अर‍विंद कुमार सिंह

  1. मजदूरों की व्यथा दर्शाया, साधूवाद ।

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