योगी सरकार का एक माह

शार्प रिपोर्टर डॉट इन 
किसी भी सरकार के कार्यकाल और क्रियाकलापों के समग्र मूल्यांकन के लिए एक माह का समय अधिक नहीं होता। सरकार की भावी रणनीति और विकास की रुपरेखा को समझने के लिए भी कम से कम छः माह का समय अवश्य दिया जाना चाहिए। लेकिन योगी सरकार इसका अपवाद है। कुछ अति उत्साही राजनीतिक विश्लेषक और पूर्वाग्रही सियासी दल के पहरुआ पहले दिन से ही सरकार के छिद्रान्वेषण पर उतारु हैं और इस निष्कर्ष पर हैं कि योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की खैर नहीं। बहरहाल सरकार विपक्ष की इस निर्मम आलोचना से विचलित हुए बिना अपनी संपूर्ण उर्जा प्रत्युत्तर के बजाए भरोसे की कसौटी पर खरा उतरने में खर्च कर रहा है। सरकार के इस सकारात्मक पहल और सोच से जनता की उम्मीदें बढ़ी है और वह बदलाव में सरकार के साथ सहयोग को तैयार है। सरकार और जनता दोनों के सहयोग से ही उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बन सकता है। एक माह के कार्यकाल में योगी सरकार ने जिस तत्परता से लोकहित में सैकड़ों निर्णय लिए हंै, वह न सिर्फ स्वतंत्र भारत के इतिहास में मिसाल है बल्कि एक लोककल्याणकारी सरकार का कर्तव्य क्या होना चाहिए उसे भी प्रभावी ढंग से रेखांकित करता है। एक निर्वाचित सरकार को कल्याणकारी और सही मायने में लोकतांत्रिक सरकार में रुपांतरित होने के लिए लक्ष्य और लक्ष्य प्राप्त करने के साधन दोनों स्पष्ट होने चाहिए। इस संदर्भ में योगी सरकार कसौटी पर खरा है। उसके लक्ष्य स्पष्ट हैं और नीति व कार्यक्रम पारदर्शी हैं। किसी भी किस्म का गुप्त एजेंडा नहीं है।

सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा होनी चाहिए कि उन्होंने शपथ लेते ही स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार बिना भेदभाव के साथ काम करेगी। सरकार की प्राथमिकता में राज्य में कानून का शासन स्थापित करना और भ्रष्टाचार मिटाना सर्वोपरि होगा। गौर करें तो सरकार ने इस लक्ष्य को अपने उदार चरित्र और कठोर निर्णयों के जरिए साबित भी किया है। उसी का परिणाम है कि पूर्ववर्ती सरकार में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने के लिए बदनाम शासन-प्रशासन अब सक्रिय है और हर गैरकानूनी कार्यों पर शिकंजा कसने को तत्पर है। कल तक एनजीटी और सर्वोच्च अदालत के आदेशों की धज्ज्यिां उड़ाने वाले अवैध बूचड़खानों पर अब ताले लटकने लगे हैं।एंटी रोमियो अभियान के जरिए उन अवांछित तत्वों पर नकेल कसा है जो कल तक कानून-व्यवस्था स्थापित करने की राह में बाधा थे। हालांकि विपक्षी दलों ने इन दोनों फैसलों को सांप्रदायिक और तानाशाही के फ्रेम में फिट कर सियासत करने की भरपूर कोशिश की लेकिन अंततः उन्हें मुंह की खानी पड़ी। कल्याणकारी राज्य के विरुद्ध उनकी सांप्रदायिक साजिश बेनकाब हो गयी। एक माह की सरकार के परिणामकारी कार्यों पर दृष्टिपात करें तो वह अपने चुनावी वादों को अमलीजामा पहनाते हुए कैबिनेट की पहली बैठक में ही लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपए तक का फसली ऋण माफ कर वादे की कसौटी पर खरा उतरी है। सरकार के इस निर्णय से तकरीबन 2.15 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे और कर्जमाफी से सूखा, बाढ़ और आपदा की मार से त्रस्त किसानों को उबरने में मदद मिलेगी। किसान कृषि कार्य के प्रति उन्मुख होंगे और कृषि विकास दर में वृद्धि होगी। सरकार का मानना है कि कर्जमाफी से 2016-17 में राज्य के सकल घरेलू उत्पादन की जो अनुमानित वृद्धि दर 7.5 फीसद है, उसमें उछाल आएगा और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होगी।

सरकार ने किसानों की सेहत सुधारने के लिए कुछ अहम निर्णय लिए हैं जो काबिले तारीफ है। मसलन किसानों से 80 लाख मिट्रिक टन गेहूं और एक लाख मिट्रिक टन आलू खरीदा जाएगा। पांच हजार गेहूं क्रय केंद्र खोलकर सरकार ने विचैलियों की भूमिका समाप्त कर दी है। अब किसानों को उनकी उपज का वाजिब मिल सकेगां। सरकार ने गन्ना मिलों को 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। निःसंदेह इस पहल से किसानों के दिन फिरेंगे और आत्महत्या की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। कृषि एवं उद्योग-धंधों के विकास के लिए बिजली महत्वपूर्ण है। सरकार ने बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गांवों को 18, तहसील मुख्यालय को 20 और जिला मुख्यालय को 24 घंटे बिजली देने का आदेश दिया है। औद्योगिक रफ्तार तेज करने के लिए नई औद्योगिक नीति और सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने के लिए मत्रियों के समूह का एलान किया गया है। कामकाज बाधित न हो और पारदर्शिता बनी रहे इसके लिए मंत्रियों की समिति के प्रस्ताव पर जिलाधिकारी को छः माह तक दस एकड़ तक की भूमि पर खनन पट्टा का अधिकार दिया गया है। भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए ई-टेंडरिंग के अलावा विकास प्राधिकरणों का आॅडिट सीएजी से कराने का निर्णय एवं पूववर्ती सरकार के दौरान योजनाओं में हुए घपले-घोटाले की जांच का आदेश एक क्रांतिकारी कदम है। सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए भी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। चूंकि प्रदेश में चिकित्सकों की भारी कमी है लिहाजा सरकार की मंशा एग्रेसिव कैंपेन चलाकर कम से कम डेढ़-दो हजार चिकित्सकों की नियुक्ति करने की है। पिछले दिनों सरकार ने एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस का लोकार्पण किया और भरोसा दिया कि एम्स या बड़े अस्पतालों के स्पेशलिस्ट डाॅक्टर सरकारी अस्पतालों में बुलाए जाएंगे। यह इसलिए भी आवश्यक है कि विगत वर्षों में उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की हालत बद से बदतर हुई है। अस्पतालों में न तो दवा है और न ही आवश्यक सुविधाएं। बारिश के दिनों में पूर्वांचल में दिमागी बुखार का कहर चरम पर होता है। हर वर्ष सैकड़ों बच्चे मौत के मुंह में जाते हैं। अभी तक इस बीमारी का सटीक इलाज ढुंढा नहीं जा सका है। बहरहाल सरकार के सकारात्मक पहल से जनता की उम्मीदें बंधी है। जनतंत्र में सरकार का जनता से निकटता भरोसा पैदा करती है। एक माह के कार्यकाल का मूल्यांकन करें तो इस कसौटी पर योगी सरकार खरा है। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना द्वार जनता के लिए खोल दिए हैं। हर रोज उनसे हजारों फरियादी मिल रहे हैं। सरकार के स्तर से लोगों की कठिनाईयां दूर हो रही है।

पिछले दिनों मुस्लिम महिलाएं भी मुख्यमंत्री योगी से मिली जो तीन तलाक का दंश झेल रही हैं। उन्हें भरोसा है कि योगी सरकार उनकी बेहतरी के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। यह भरोसा कई मायने में महत्वपूर्ण है। इसलिए और भी कि मौजूदा दौर में राजनीतिक तरीकों और राजनीतिज्ञों के प्रति लोगों का भरोसा घटा है। दूसरी ओर पूर्ववर्ती सरकारों ने विशिष्ट वर्ग के शासन का सिद्धांत को स्थापित कर गरीबों की अनदेखी की है। विपक्षी दलों ने यह भी दुष्प्रचार किया है कि भाजपा की सरकार मुसलमानों की विरोधी है। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक माह के कार्यकाल में साबित और सुनिश्चित किया है कि उनकी सरकार विशिष्ट वर्ग की सरकार नहीं बल्कि प्रदेश की जनता को समर्पित किसानों और गरीबों की सरकार है। सरकार ने पांच लाख श्रमिकों का बीमा कराने, पशुधन योजना प्रारंभ करने, किसानों की आय दुगुना करने, विधवा, दिव्यांगजन तथा वृद्धावस्था पेंशन दुगुना करने तथा सरकारी व गरीबों की जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का एलान कर गरीबों व किसानों की सरकार होने का सबूत भी दिया है। यही नहीं उन्होंने स्वयं सत्ता सुलभ सुविधाओं का परित्याग कर और सादगी भरा जीवन बिताने का अनुपम उदाहरण पेश कर मिसाल कायम की है। साफ-सुथरी सरकार देने के लिए नौकरशाहों और अपने मंत्रियों को संपत्ति का खुलासा करने का आदेश देकर एक नई कार्य संस्कृति विकसित की है। इस पहल से जनता प्रसन्न है और सरकार का इकबाल बुलंद है।

अरविंद जयतिलक

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