पाकिस्तान की घिनौनी हरकत का करारा जवाब

शार्प रिपोर्टर डॉट इन
यह उचित है कि भारत ने पाकिस्तान के बार्डर एक्शन टीम के सैनिकों द्वारा पुंछ के कृष्णा घाटी में दो भारतीय जवानों की हत्या और उनके शव के साथ बर्बरता का जवाब देते हुए 10 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिरा अपने सैनिकों की शहादत का बदला ले लिया। मानवीय मर्यादा की भाषा न समझने वाले नृशंस पाकिस्तान को यह गहरा चोट देना इसलिए भी आवश्यक था कि वह इसी का पात्र भी है। आखिर भारत अपनी सब्र की परीक्षा कब तक देता रहे। यह सच्चाई है कि पाकिस्तानी बार्डर एक्शन टीम (बैट) के सैनिक भारत की चेतावनी के बाद भी बार-बार अपने सनक भरे कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं। अभी गत वर्ष ही अक्टुबर में पाकिस्तान बार्डर एक्शन टीम के सैनिकों ने मच्छल सेक्टर में तीन सैनिकों की हत्या कर एक सैनिक के शव के साथ बर्बरता किया। 8 जनवरी, 2013 को जवान हेमराज के शव के साथ भीऐसा ही क्रुर व्यवहार किया गया। 2013 में पाकिस्तान के जेल में बंद भारतीय कैदी सरबजीत के शव को भारत भेजने से पहले उसके कई अंगाों को निकाल लिया गया। फिलहाल कहना कठिन है कि भारत के कड़े प्रतिकार में जान गंवा चुके दस सैनिकों के खोने के बाद पाकिस्तान सुधरेगा और उसके सैनिक पुनः भारतीय सैनिकों को निशाना नहीं बनाएंगे। बहरहाल भविष्य में पाकिस्तान का व्यवहार चाहे जैसा भी रहे किंतु उसके समझ में एक बात जरुर आ गयी होगी कि भारतीय जवानों की हत्या और उनके शव के साथ नृशंसतापूर्ण आचरण की कीमत देर-सबेर उसे चुकानी ही होगी। पाकिस्तान के इस दलील पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि उसके सैनिकों ने भारतीय सैनिकों के शव के साथ अमानवीयता का व्यवहार नहीं किया। पाकिस्तान झूठ बोलता है और दुनिया का कोई भी देश उस पर विश्वास नहीं करता। सच तो यह है कि पाकिस्तानी बार्डर एक्शन टीम में उसके सैनिक कम आतंकी ज्यादा हैं। पाकिस्तानी आतंकी सैनिकों की इस कायराना हरकत से भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व विचलित है। उसके समझ के बाहर है कि जब भारत बार-बार पाकिस्तान से दोस्ती का प्रयास कर रहा है तो फिर वह भारत की पीठ में छूरा क्यों घोंप रहा है? अगर पाकिस्तान तनिक भी संवेदनशील होता तो वह अपने सैनिकों को जिनेवा समझौते की कद्र करने की सलाह देता। इस समझौते में शत्रु देश के सैनिकों के साथ मानवीयता से पेश आने का प्रावधान है। लेकिन उसके सैनिक इस समझौते का पालन न कर बार-बार रेखांकित कर रहे हैं कि पाकिस्तान कोई देश नहीं बल्कि आतंक का गढ़ है। अगर पाकिस्तान सचमुच भारत से बेहतर संबंधों का हिमायती है तो उसे संघर्ष विराम का उलंघन कर सीमा पर तनाव का माहौल निर्मित करने से बचना चाहिए। उल्लेखनीय है कि 2003 में ही दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम समझौता हुआ था। भारत इसका लगातार पालन कर रहा है जबकि पाकिस्तान की ओर से लगतार उलंघन हो रहा है। पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से अब तक वह तकरीबन 600 बार संघर्ष विराम का उलंघन कर चुका है। दो राय नहीं कि वह पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक से चिढ़ा हुआ है और अपनी चिढ़ मिटाने के लिए बार-बाार संघर्ष विराम का उलंघन कर भारतीय सैनिकों को निशाना बना रहा है। उसे पता है कि आमने-सामने के युद्ध में वह भारत का मुकाबला नहीं कर सकता। ऐसे में वह सीमा पर छद्मपूर्ण तरीके से भारतीय सैनिकों पर वार कर देश-दुनिया का ध्यान कश्मीर की ओर आकर्षित करना चाहता है। उसकी मंशा अंतर्राष्ट्रीय मंचों के जरिए भारत की घेराबंदी करना है। यही वजह है कि उसके सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा कश्मीरियों के ‘आत्मनिर्णय के अधिकार’ का समर्थन कर रहे हैं। दरअसल पाकिस्तान की चिंता यह भी है कि भारत विश्व बिरादरी को यह समझाने में कामयाब हुआ है कि पाकिस्तान एक आतंकी देश है और उस पर नकेल नहीं कसा गया तो आने वाले वक्त में वह दुनिया के लिए खतरनाक साबित होगा। उसका कारण यह है कि पाकिस्तान के पास सैकड़ों परमाणु बम हैं और अगर वह आतंकियों के हाथ लगा तो वे इसका इस्तेमाल करने से हिचकेगें नहीं। पाकिस्तान भी अच्छी तरह समझ रहा है कि भारत की कुटनीति से वह विश्व बिरादरी से अलग-थलग पड़ने लगा है।

गत वर्ष जिस तरह वह सार्क सम्मेलन स्थगित करने के लिए विवश हुआ और सभी पड़ोसी देशों ने भारत का समर्थन कर पाकिस्तान की धरती पर कदम रखने से मना कर दिया उससे पाकिस्तान विचलित है और उसकी छवि बुरी तरह धुमिल हुई है। दूसरी ओर वैश्विक कुटनीतिक परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलाव से भी पाकिस्तान चिंतित है। अमेरिका से उसकी दोस्ती अब पहले जैसी नहीं रही। अमेरिका ने दो टूक कह दिया है कि अगर वह आतंकवाद पर लगाम नहीं कसा तो उसके सैनिक खुद पाकिस्तान में पसरे आतंकियों को खत्म करेंगे। चूंकि अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आतंकवाद को लेकर बेहद सख्त हैं और पिछले दिनों उनके इशारे पर अफगानिस्तान में पसरे आतंकियों को अमेरिकी सैनिकों ने भीषण बम का प्रहार कर मार गिराया उससे पाकिस्तान के मन में खौफ फैल गया है कि अगर उसकी छवि आतंकी देश की बनी रही तो अमेरिका कभी भी उसे निशाने पर ले सकता है। पाकिस्तान अभी भूला भी नहीं है कि किस तरह अमेरिकी सैनिकों ने एबटाबाद में कमांडों आॅपरेशन के जरिए दुनिया के मोस्ट वांटेड आतंकी ओसामा-बिन-लादेन को मार गिराया। पाकिस्तान को यह भी डर है कि भारत उस पर कभी भी हमला बोल सकता है। गत माह पहले भारत के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने कहा भी कि पहले परमाणु हमले न करने की प्रतिबद्धता पर भारत विचार कर सकता है। मतलब साफ है कि अगर शत्रु देश की ओर से परमाणु हमले का अंदेशा होगा तो भारत पहले ही परमाणु हमला कर देगा। यही नहीं भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा बलूचिस्तानी नागरिकों को नैतिक समर्थन दिए जाने और बलूच आंदोलन के तेज होने के कारण भी पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी नरेंद्र मोदी ने अमेरिका को पाकिस्तान से दूर कर उसकी नकारात्मक कुटनीति की कमर तोड़ दी है। इसके अलावा उन्होंने चाबहार समझौते और हेरात स्थित सलमा डैम के जरिए ईरान और अफगानिस्तान से संबंध प्रगाढ़ कर पाकिस्तान को अपनी ही खोल में सिमटने को मजबूर कर दिया है। इन हालातों के बीच अब पाकिस्तान की कोशिश अंतर्राष्ट्रीय मंचों के जरिए भारत पर दबाव बनाकर उसकी ओर से होने वाले संभावित आक्रमण को रोकना और निश्चिंत होना है। भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए वह संयुक्त राष्ट्र में सिंधु जल विवाद मामले को भी उठाया है। गौरतलब है कि भारत ने उरी हमले के बाद 56 वर्ष पुराने सिंधु जल समझौते को रद्द करने का निर्णय किया है। अगर भारत अपने निर्णय पर कायम रहा तो पाकिस्तान पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस जाएगा और उसकी कृषि और उद्योग-धंधे चैपट हो जाएंगे। कल-कारखानों के पहिए थम जाएंगे और देश में अराजकता की स्थिति उत्पन हो जाएगी। अच्छी बात यह है कि विश्व बिरादरी पाकिस्तान की इस दलील पर ध्यान देने को तैयार नहीं कि भारत उसे परेशान कर रहा है।

संभवतः यहीं कारण है कि वह सीमा पर तनाव पैदा कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है। इसके अलावा कुछ अन्य अंदरुनी वजहें भी हैं जिसके कारण पाकिस्तान सीमा पर हलचल पैदा कर रहा है। ध्यान देना होगा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पनामा भ्रष्टाचार मामले में बुरी तरह घिर चुके हैं। विपक्ष उन पर इस्तीफा का लगातार दबाव बना रहा है। अकसर देखा जाता है कि जब भी पाकिस्तान अंदरुनी कलह से गुजरता है तो वहां की सरकार और सेना भारत के साथ युद्ध का माहौल निर्मित कर जनता का ध्यान बंटाने की कोशिश करती है। यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान में अराजकता की स्थिति है और चारो तरफ लूटमार मचा है। भूखमरी और बेरोजगारी के कारण गरीबों और युवाओं में आक्रोश है। आंतकियों का हौसला बुलंद है। वे आए दिन सार्वजनिक स्थानों पर खून बहा रहे हैं। लेकिन गौर करें तो इसके लिए पाकिस्तान की सेना और सरकार की आतंकी नीतियां ही जिम्मेदार है।

 

 

 

-अरविंद जयतिलक

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