सृजन घोटाला, जांच और प्रगति पर 10 खास बातें

इस पूरे घोटाले की सरगना या मास्टरमाइंड मनोरमा देवी नामक महिला हैं जिनका इस साल फ़रवरी में निधन हो गया. मनोरमा देवी की मौत के बाद उनकी बहू प्रिया और बेटा अमित कुमार इस घोटाले के सूत्रधार बने. प्रिया झारखण्ड कांग्रेस के वरिस्ठ नेता अनादि ब्रह्मा की बेटी हैं जो पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के करीबी माने जाते हैं.
मनोरमा देवी और उनकी संस्था सृजन को शुरू के दिनों में कई आईएएस अधिकारियों जिसमें – अमिताभ वर्मा, गोरेलाल यादव, के पी रामैया शामिल हैं, ने बढ़ाया. गोरेलाल यादव के समय एक अनुसंशा पर दिसंबर 2003 में सृजन के बैंक खाते में सरकारी पैसा जमा करने का आदेश दिया गया. उस समय बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं. रामैया ने 200 रुपये के महीने पर सबौर ब्लॉक में एक बड़ा जमीं का टुकड़ा सृजन को दिया.
किसी जिला अधिकारी के कार्यकाल में अगर सर्वाधिक सृजन के खाते में पैसा गया तो वो था वीरेंद्र यादव जिसके 2014 से 2015 के बीच करीब 285 करोड़ सृजन के खाते में गया. वीरेन्द्र भी लालू यादव के करीबी माने जाते हैं.
अभी तक की जांच में ये पाया गया कि सरकारी राशि को सरकारी बैंक खाता में जमा करने के बाद तत्काल अवैध रूप से साजिश के तहत या तो जाली दस्तखत या बैंकिंग प्रक्रिया का दुरुपयोग कर ट्रांसफर कर लिया जाता था. जब भी किसी लाभार्थी को चेक के द्वारा सरकारी राशि का भुगतान किया जाता था तो उसके पूर्व ही अपेक्षित राशि सृजन द्वारा सरकारी खता में जमा कर दिया जाता था.
इस सरकारी राशि के अवैध ट्रांसफर में सृजन के सचिव मनोरमा देवी के अलावा, सरकारी पदाधिकारी और कर्मचारी और दो बैंको – बैंक ऑफ़ बरोडा और इंडियन बैंक के पदाधिकारी और उनके कर्मचारी पूरे साजिश में सक्रिय रूप से शामिल होते थे.
जिला प्रशासन से सम्बंधित बैंक खातों के पासबुक में एंट्री भी फ़र्ज़ी तरीके से की जाती थी. स्टेटमेंट ऑफ़ अकाउंट को बैंकिंग सॉफ्टवेयर से तैयार नहीं कर फ़र्ज़ी तरीके से तैयार किया जाता था.
मनोरमा देवी सृजन के खाते में जमा पैसा को बाजार में ऊंचे सूद पर देती थी या अपने मनपसंद लोगों को जमीन, व्यापार या अन्य धंधे में निवेश करने के लिए देती थी. पूरे साजिश में शामिल अधिकरियों का भी वो पूरा ख्याल रखती थी. उन्हें करोड़ तक कमीशन या आभूषण दिए जाते थे.
मनोरमा देवी के कुछ राजनेताओं से करीबी सम्बन्ध रहे हैं जिनमें बीजेपी के अब निलंबित विपिन शर्मा, पूर्व सांसद शहनवाज हुसैन और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह शामिल हैं. इन लोगों की नजदीकी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये उनके ऑफिसियल कार्यक्रम के अलावा निजी कार्यक्रम में नियमित रूप से शामिल होते थे.
पिछले साल नोटबन्दी के बाद सृजन के काम काज पर भी असर पड़ा. माना जा रहा है कि पैसा फंस जाने के कारण असल मुश्किलें शुरू हुईं और चेक बाउंस होने का सिलसिला शुरू हो गया.
अमित, प्रिया, विपिन शर्मा इस पूरे घोटाले के वो राजदार हैं जिनकी गिरफ़्तारी और पूछताछ से पूरे मामले के हर पहलु से पर्दा उठने की उम्मीद हैं. अमित, प्रिया का अंतिम लोकेशन रांची में मिला था. लेकिन उनके पिता अब किसी जानकारी से इंकार करते हैं.

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