गुंजेश्वरी प्रसादः जिसने अन्तिम सांस भी समाजवादी चोले में ली……. 

-अरविन्द कुमार सिंह वह सन् 2008 का फरवरी या मार्च का महीना रहा होगा, जब पहली बार मैं और आजमगढ़ के धूर समाजवादी…

Read More

‘वृद्धावस्था विमर्श’ तथा ‘संकल्पना’ लोकार्पित

साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘साहित्य मंथन’  के तत्वावधान में आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमीके नामपल्ली स्थित सभाकक्ष में स्व. चंद्रमौलेश्वर प्रसाद कृत ‘वृद्धावस्था विमर्श’ तथा ऋषभदेव…

Read More

इरोम शर्मिला चानू: मेरी आवाज़ गूंगी है कि तेरे कान बहरे हैं ?

पूर्वोत्तर की आवाज़:-अरविन्द कुमार सिंह नवम्बर-2000 में, जब मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू ?आफ्स्पा? के विरूद्व भूख हडताल शुरू कीं, तब…

Read More