जिसमें देश अपना, कल का ‘नायक’ देख रहा है…

-अरविन्द कुमार सिंह   चार साल पहले दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर गाँधीवादी अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार से बिलबिलायी जनता जनलोकपाल और…

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चमन को सीचने में पत्तियाँ कुछ झड़ गयी होंगी …

-बीरेन्द्र सिंह चन्द्रशेखर! भारतीय राजनीति में अदम्य साहस का वह नाम है, जिसने जीवन की अंतिम सांस तक झुकना नहीं सिखा, विचारों की…

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भारतीय किसानी की नियति है ‘गजेन्द्र की मौत’

भारतीय किसानी की नियति है ‘गजेन्द्र की मौत’ अरविन्द कुमार सिंह-संपादक ‘शार्प रिपोर्टर’   68 साला हिन्दुस्तानी ज़म्हूरियत का एक दर्दनाक मंजर लुटियन्स…

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इरोम शर्मिला चानू: मेरी आवाज़ गूंगी है कि तेरे कान बहरे हैं ?

पूर्वोत्तर की आवाज़:-अरविन्द कुमार सिंह नवम्बर-2000 में, जब मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू ?आफ्स्पा? के विरूद्व भूख हडताल शुरू कीं, तब…

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