चमन को सीचने में पत्तियाँ कुछ झड़ गयी होंगी …

-बीरेन्द्र सिंह चन्द्रशेखर! भारतीय राजनीति में अदम्य साहस का वह नाम है, जिसने जीवन की अंतिम सांस तक झुकना नहीं सिखा, विचारों की…

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भारतीय किसानी की नियति है ‘गजेन्द्र की मौत’

भारतीय किसानी की नियति है ‘गजेन्द्र की मौत’ अरविन्द कुमार सिंह-संपादक ‘शार्प रिपोर्टर’   68 साला हिन्दुस्तानी ज़म्हूरियत का एक दर्दनाक मंजर लुटियन्स…

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‘सूरज के छिपने तक’ : मौलिकता के मूल से मुलाक़ात

रविराज पटेल परिलेख प्रकाशन, नजीबाबाद की नवीनतम प्रस्तुति ‘सूरज के छिपने तक’ एक सारगर्भित काव्य संग्रह है | मूलतः पटना निवासी कवयित्री रश्मि…

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गुंजेश्वरी प्रसादः जिसने अन्तिम सांस भी समाजवादी चोले में ली……. 

-अरविन्द कुमार सिंह वह सन् 2008 का फरवरी या मार्च का महीना रहा होगा, जब पहली बार मैं और आजमगढ़ के धूर समाजवादी…

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‘वृद्धावस्था विमर्श’ तथा ‘संकल्पना’ लोकार्पित

साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘साहित्य मंथन’  के तत्वावधान में आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमीके नामपल्ली स्थित सभाकक्ष में स्व. चंद्रमौलेश्वर प्रसाद कृत ‘वृद्धावस्था विमर्श’ तथा ऋषभदेव…

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इरोम शर्मिला चानू: मेरी आवाज़ गूंगी है कि तेरे कान बहरे हैं ?

पूर्वोत्तर की आवाज़:-अरविन्द कुमार सिंह नवम्बर-2000 में, जब मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू ?आफ्स्पा? के विरूद्व भूख हडताल शुरू कीं, तब…

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